Trimbakeshwar मंदिर से जुडी इस कहानी को नहीं जानते होंगे आप? गौतम ऋषि और गंगा से जुडी है इस मंदिर की कहानी!!!!!1 min read

Trimbakeshwar
Spread the love

Trimbakeshwar: हिन्दू धर्म में भगवान शिव की विशेष मान्यता है। इनसे जुड़े 12 ज्योतिर्लिंगों को लेकर हिन्दू धर्म में काफी श्रद्धा है। हर हिन्दू चाहता है कि वो भगवान शिव से जुड़े इन सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करे। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग कहानी है। उनसे जुडी कई सारी मान्यता भी है।

अपने पिछले blog में हमने Somnath, Mallikarjua, Mahakaleshwar, Omkareshwar, Kedarnath, Kashi Vishvanath, और Rameshwaram ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताया है but हम आज जिस ज्योतिर्लिंग के बारे में बताएंगे वो भगवान शिव के दूसरे सभी ज्योतिर्लिंगों से बिलकुल अलग है। आज के इस blog म हम Trimbakeshwar के बारे में बताएँगे।

Join our telegram channel  https://t.me/sandeshpatr

Trimbakeshwar Temple

भगवान शिव के जितने भी ज्योतिर्लिंग है उन सभी मंदिरो में भगवान शिव की अकेले शिवलिंग है लेकिन Trimbakeshwar में भगवान शिव त्रिदेव यानि ब्रह्मा, विष्णु और महेश रूप में पूजे जाते है। इस वजह से यह मंदिर भगवान शिव के अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों में बेहद खास है।

यह मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरी पर्वत पर स्थित है। ब्रह्मगिरी पर्वत से भारत की दूसरी सबसे लम्बी नदी गोदावरी बहती है। इस गोदावरी नदी के किनारे यह मंदिर है। मंदिर से जुडी कई सारी मान्यताएं भी है। हर मान्यता के अनुसार मंदिर से जुडी अलग अलग कहानी है।

मंदिर से जुडी मान्यताएं

शिवपुराण के अनुसार इस मंदिर क कहानी गौतम ऋषि से जुडी है। इस मंदिर का इतिहास काफी बेहद ही दिलचस्प है। इस जगह पर गौतम ऋषि कई सारे ऋषियों के साथ रहते थे। उनमे से काफी सारे ऋषि, गौतम ऋषि से जलते थे। और हर वक़्त उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते थे।

उनके साथ रहने वाले ऋषिओ की पत्नियाँ एक बार गौतम ऋषि की पत्नी से किसी बात पर नाराज़ हो गई और अपने पतियों से गौतम ऋषि का अपनाम करने के लिए के कहा। तब उन ऋषियों ने भगवान गणेश की की पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया। उनकी पूजा से खुश होकर गणेषजी ने उन्हें वरदान मांगने को बोला।

तब उन ब्राह्मणो ने गणेशजी से बोला यदि आप हमपर प्रसन्न है और आप हमें वरदान देना चाहता है तो किसी भी तरह गौतम ऋषि को इस आश्रम से बाहर निकाल दीजिये। ये सुनकर गणेशजी ने उन ऋषियों को ऐसा न करने का सुझाव दिया लेकिन ऋषियों ने उनकी बात नहीं मानी। आख़िरकार गणेशजी को उन्हें ये वरदान देना ही पड़ा।

गणेशजी ने तब एक बहुत कमजोर गाय का रूप धारण किया और गौतम ऋषि के आश्रम में रहने के लिए चले गए। गाय को घास चरते हुए देख गौतम ऋषि ने घास के एक टुकड़े से गाय को हाँकने लगे। घास के चुने से ही गाय जमीन पर गिर गयी और मर गई।

Follow us on Instagram  https://www.instagram.com/sandesh.patr/

तब सारे ऋषि ने गौतम ऋषि पर गौ हत्या का आरोप लगाया। इस घटना से गौतम ऋषि काफी दुखी हो गए। ऋषियों ने गौतम ऋषि ने कहा की उन्होंने गाय की हत्या की इसलिए उन्हें इस आश्रम में रहने का कोई अधिकार नहीं है। गौतम ऋषि अपनी पत्नी अहिल्या के साथ वहां से दूर रहने के लिए चले गए।

लेकिन उन सारे ऋषियों ने उनका वहां रहना भी मुश्किल कर दिया और उनके पूजा पाठ करने पर भी रोक लगा दी। इस स्थिति में गौतम ऋषि ने उन सभी ऋषियों से इस पाप से मुक्ति के लिए उपाय पूछा। उन ऋषियों ने बताया कि अब आपको पूरी पृथ्वी की 3 बार चक्कर लगाना होगा और वापस आने के बाद 1 महीने का कठिन उपवास करना होगा साथ ही साथ ब्रह्मगिरी पर्वत के 101 चक्कर लगाने के बाद ही इस आपको इस पाप से मुक्ति मिलेगी।

या फिर गंगा नदी को यहाँ लेकर 1 करोड़ पार्थिव शिवलिंग से भगवान शिव की पूजा करनी होगी। इसके बाद गंगा नदी में स्नान करके ब्रह्मगिरि पर्वत के 11 बार चक्कर लगाना पड़ेगा। फिर 100 घड़ो के पवित्र जल से पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने के बाद ही आपको इस पाप से मुक्ति मिलेगी।

गंगाजी ने गौतम ऋषि से कहा कि जब तक भगवान शिव यहाँ नहीं रहेंगे तब तक मैं यहाँ नहीं आउंगी। फिर गौतम ऋषि ने भगवान शिव की पूजा करके उन्हें खुश किया और इसी स्थान पर रहने के लिए मनाया। इसके बाद भगवान शिव यहाँ अपनी पत्नी माता पार्वती के साथ रहने लगे। तब से ये जगह Trimbakeshwar के नाम से famous हो गया।

महाभारत से भी जुड़ी हुई है Trimbakeshwar की कहानी

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में सोने का छत्र पांडवो ने दान दिया था। महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद पांडव भगवान शिव की पूजा कर रहे थे। उसी दौरान पांडवो ने इस मंदिर में भी पूजा की और सोने का छत्र दान में दिया था।

Follow us on twitter https://twitter.com/sandeshpatr

औरंगजेब ने किया था मंदिर पर हमला

मुगल शासन के दौरान हर मुगल शासक ने कई मंदिर पर हमला किया। औरंगज़ेब ने इस मंदिर पर हमला किया और इसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया। 1690 में मुगल शासक औरंगजेब ने इस मंदिर के तोडा और मंदिर तोड़कर मस्जिद का गुम्बद बनवाया। इतना ही नहीं उसने इस मंदिर का नाम भी बदल दिया। 1751 में मराठों ने फिर से इस स्थान पर राज किया और इसी जगह पर मंदिर का renovation करवाया।

क्यों खास है ये मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से बेहद खास है। यह ज्योतिर्लिंग तीनमुखी है जिसमे ब्रह्मा, विष्णु और महेश है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पेशवा बालाजी बाजीराव III ने एक पुराने मंदिर के स्थान पर कराया था। इस मंदिर के चार दिशाओ में एक एक प्रवेश द्वार है जिसमे हर द्वार अलग अलग चीज़ो का प्रतीक है।

उत्तर द्वार रहस्योद्घाटन, दक्षिण द्वार पूर्णता, पूर्व द्वार शुरुआत, पश्चिम द्वार परिपक्वता को दर्शाता है। सावन के महीने में इस मंदिर में पूजा करने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते है। सावन में इस मंदिर में इस पूजा करने से काफी पुण्य मिलता है।

Conclusion

भगवान शिव के हर ज्योतिर्लिंग के पीछे कई सारी मान्यता है। हर ज्योतिर्लिंग के पीछे एक अलग अलग कहानी है। हर ज्योतिर्लिंग अपने आप में विशेष है लेकिन Trimbakeshwar बेहद खास है। इस मंदिर में तीनमुखी शिवलिंग है तो त्रिदेव का प्रतीक है। अगर आपको ये blog पसंद आया हो तो comment के through हमें जरूर बताएं।

Our more blogs in this category is here https://sandeshpatr.com/category/spritual/