Omkareshwar Temple का इतिहास क्या है ?क्या है इस मंदिर की कहानी ?1 min read

Omkareshwar Temple
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भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में ओम्कारेश्वर सबसे अद्भुत है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से ओम्कारेश्वर चौथा स्थान रखता है। माना जाता है कि भगवान शिव हर रात को यहाँ सोने के लिए आते है। Omkareshwar Temple मध्य प्रदेश के खांडवा district में हैं। यह मंदिर नर्मदा नदी के किनारे ॐ shape के एक पहाड़ पर बसा हुआ है। भगवान शिव के इस चमत्कारी और रहस्यमयी ज्योतिर्लिंग को लेकर यह भी मान्यता है कि इस तीर्थस्थल पर जल चढ़ाए बिना व्यक्ति की सारी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती है।

किसने बनवाया Omkareshwar Temple?

Omkareshwar Temple, मध्य प्रदेश राज्य के खांडवा जिले में है और यह हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इस मंदिर का निर्माण साल 1063 में राजा उदयादित्य द्वारा चार पत्थरों की स्थापना के साथ प्रारंभ हुआ था। ये पत्थर भारतीय culture के प्रतीक हैं । फिर साल 1195 में राजा भारत सिंह चौहान ने इस मंदिर का renovation करवाया।

इसके बाद यहाँ मान्धाता शासकों ने राज किया। इनमें सिंधियाँ, मालवा, और परमार शामिल थे। इन राजाओं ने भी मंदिर के development and structure में अपना योगदान दिया। साल 1824 में British Government ने इस area अपने control में ले लिया। इसकी स्थापना और विकास में अलग अलग राजाओ और शासकों का योगदान है, जिनके प्रयासों से यह मंदिर आज भी धार्मिकता और संस्कृति का केंद्र है।

मंदिर की कहानी

मध्य प्रदेश के इस क्षेत्र में Omkareshwar Temple का बहुत महत्व है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तीर्थस्थलों में गिना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ का दर्शन करने से तीर्थयात्री को अनेक धर्मिक फल प्राप्त होते हैं। मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सभी तीर्थस्थलो का दर्शन कर भी ले लेकिन ओंकारेश्वर में स्नान न करे, तो उसके सभी तीर्थ अधूरे माने जाते हैं।

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Omkareshwar Temple में 24 अवतार, माता घाट, सीता वाटिका, धावड़ी कुंड, मार्कण्डेय शिला, मार्कण्डेय संन्यास आश्रम, अन्नपूर्णाश्रम, विज्ञान शाला, बड़े हनुमान, खेड़ापति हनुमान, ओंकार मठ, माता आनंदमयी आश्रम, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, गायत्री माता मंदिर, सिद्धनाथ गौरी सोमनाथ, आड़े हनुमान, माता वैष्णोदेवी मंदिर, चाँद-सूरज दरवाजे, वीरखला, विष्णु मंदिर, ब्रह्मेश्वर मंदिर, सेगाँव के गजानन महाराज का मंदिर, काशी विश्वनाथ, नरसिंह टेकरी, कुबेरेश्वर महादेव, चन्द्रमोलेश्वर महादेव के मंदिर शामिल हैं। ये सभी स्थान spirituality के संदेश को प्रस्तुत करते हैं ।

ओंकारेश्वर क्षेत्र के तीर्थ स्थलों में नर्मदाजी का विशेष महत्व है। नर्मदा नदी को माँ नर्मदा के रूप में पूजा जाता है और उसका स्नान धार्मिक पुण्य को अत्यंत बढ़ाता है। नर्मदा नदी के बारे में कहा जाता है कि जो पुण्य गंगा में 7 बार और यमुना में 15 बार नहाने से मिलता है वो नर्मदा नदी के दर्शन से ही मिल जाता है।

मंदिर से जुड़ी धार्मिक कथा

Omkareshwar Temple के बारे में एक और मान्यता है कि एक समय राजा मांधाता ने भगवान शिव को खुश करने के लिए कड़ी तपस्या की । उनकी तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और भगवान शिव ने मांधाता से दो वर मांगने को कहा।

पहले वर में, मांधाता ने भगवान शिव से इसी स्थान पर विराजमान होने की विनती की और दूसरे वर में, मांधाता ने यह कहा कि उनके नाम के साथ मेरा नाम भी जुड़ जाए। इस प्रकार, यह स्थान ‘मांधाता का ओंकारेश्वर’ के नाम से जाना जाने लगा।

Omkareshwar Temple की क्या है मान्यता?

Omkareshwar Temple के ज्योतिर्लिंग को ‘ओंकारेश्वर’ और ‘ममलेश्वर’ इन दोनों नामों से जाना जाता है। मंदिर की ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव यहां माता पार्वती के साथ रहते हैं और उनके साथ रात्रि में विश्राम करते हैं और चौसर खेलते हुए देखा जाता है। इसलिए, मंदिर में चौसर-पासे, पालना और सेज भी सजाए जाते हैं ताकि भगवान शिव और माता पार्वती को सुविधा हो सके।

ओंकारेश्वर मंदिर के प्रति भक्तों की विशेष भक्ति और श्रद्धा है। सावन के महीने में, यहां की वातावरण में भक्तों की उत्सुकता साफ दिखाई देता है। इस समय में मंदिर का माहौल आनंदमय होता है।

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यहाँ 33 करोड़ देवताओं संग विराजते हैं भगवान शिव

Omkareshwar Temple मध्य प्रदेश के इंदौर से लगभग 78 किमी की दूरी पर नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह एकमात्र मंदिर है जो नर्मदा नदी के north में स्थित है। यहां पर भगवान शिव नदी के दोनो तट पर स्थित हैं। Religious belief के अनुसार ओंकारेश्वर के आस-पास 68 तीर्थ स्थित हैं और यहां भगवान शिव 33 करोड़ देवी देवताओं के साथ विराजमान हैं। ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर दर्शन एवं पूजन करने पर व्यक्ति के सारे पाप दूर हो जाते हैं।

यहां का वातावरण शांतिपूर्ण होता है और ध्यान में लगने का सुविधाजनक है। यहां दर्शन करने के बाद भक्त अपने आत्मा को शुद्ध करते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं।

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महाशिवरात्रि के दिन Omkareshwar Temple में भक्तों की भारी भीड़ होती है। यहां लाखों भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने आते हैं। मंदिर के आसपास भक्तों की लंबी कतारें खड़ी होती हैं, जिन्हें वे शिव के दर्शन के लिए प्रतीक्षा करते हैं। इस मंदिर के दर्शन और पूजन से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य

जैसे महाकालेश्वर की भस्म आरती प्रसिद्ध है उसी तरह ओंकारेश्वर मंदिर की शयन आरती भी विश्व प्रसिद्ध है । हालांंकि Omkareshwar Temple में भगवान शिव की आरती सुबह, दोपहर और शाम को होती है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिदिन रात्रि के समय भगवान शिव यहांपर सोने के लिए लिए आते हैं। मंदिर से जुडी ऐसी भी मान्यता यह भी है कि इस मंदिर में भगवान शिव माता पार्वती के साथ चौसर खेलते हैं । यही कारण है कि रात्रि के समय यहां पर चौपड़ बिछाई जाती है और सबसे खास बात यह है की जिस मंदिर के अंदर रात के समय परिंदा भी पर नहीं मार पाता है, उसमें सुबह चौसर और उसके पासे कुछ इस तरह से बिखरे मिलते हैंं,जैसे रात के समय उसे किसी ने खेला हो।

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