Nageshvara Temple: हिन्दू धर्म में भगवान शिव को देवो के देव महादेव का दर्जा प्राप्त है। ऐसा माना जाता है कि जिस इंसान पर महादेव की कृपा हो जाये, उस इंसान के जीवन में कभी कोई कष्ट नहीं आएगा। लोग इनकी पूजा बड़े ही श्रद्धा के साथ करते है।
भगवान शिव से जुड़े कई सारे प्राचीन मंदिर है जिनमे से 12 ज्योतिर्लिंग सबसे ज्यादा important है। हर ज्योतिर्लिंग की स्थापना के पीछे अलग अलग मान्यतायें है। अपने पिछले blogs में हमने भगवान शिव से जुड़े सोमनाथ, महाकालेश्वर, रामेश्वरम, केदारनाथ, ओम्कारेश्वर, मल्लिकार्जुन, काशी विश्वनाथ, त्रिम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंगों के बारे में बताया था। आज के इस blog में Nageshvara ज्योतिर्लिंग के बारे में बतायेंगे।

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भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में से Nageshvara को 10th ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह ज्योतिर्लिंग गुजरात में श्रीद्वारकापुरी से लगभग 20 KM दूर दारुकावनम में स्थित है। इस मंदिर में महादेव की ध्यान मुद्रा में एक बहुत ही विशाल प्रतिमा बनाई गई है जो 3 KM दूर से ही दिखाई पड़ती है। यह मंदिर अत्यंत ही भव्य तरीके से बनाया गया है। महाशिवरात्रि के दिन यहाँ पूजा करने से भक्तो को उसके सभी पापो से मुक्ति मिल जाती है।
मंदिर से जुडी मान्यताएं
शिव पुराण के अनुसार दारुक नाम का एक राक्षस था जो अपनी पत्नी दारुका के साथ दारुक वन में रहता था। उस वन में बहुत सारे दैवीय औषधियाँ थी जिस कारण राक्षसों का उस वन में जाना वर्जित था। राक्षसों के वन में प्रवेश के लिए दारुका ने माता पार्वती की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया और वन में जाने की अनुमति मांगी। उसने माता पार्वती से कहा की सभी राक्षस अब सद्कर्म करेंगे इसलिए उन्हें वन में जाने की अनुमति दी जाये। माता पार्वती दारुका के इस विचार से खुश हुई और उसे वन में जाने की अनुमति दे दी।
लेकिन वन में जाने की अनुमति मिलने के बाद दारुका माता पार्वती से किये अपने वादे को भूल गयी। दारुका और उसके अन्य राक्षस साथियो ने देवी देवताओ से वन छीन लिया। उस वन में भगवान शिव की अत्यंत प्रिय भक्त सुप्रिया रहती थी। दारुका ने सुप्रिया को बंदी बना लिया।

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फिर सुप्रिया ने महादेव की तपस्या कर उनसे सभी राक्षसों के विनाश का वरदान माँगा। अपने भक्त की पुकार सुन, महादेव एक ज्योति के रूप में बिल से प्रकट हुए और सभी राक्षसो का अंत किया। इसके बाद सुप्रिया ने महादेव से प्रार्थना की कि वो इसी स्थान पर स्थापित हो जाये और अपने भक्ति की बात सुनकर महादेव उसी स्थान पर विराजमान हो जाये। उस वन में बहुत सारे सांप भी रहते थे इसलिए यह मंदिर Nageshvara कहलाया।
सर्प दोष से मुक्ति दिलाता है ये मंदिर
Nageshvara का मतलब नागो का ईश्वर होता है। महादेव के गले में मौजूद वासुकि को नागो का देवता कहा जाता है। इस मंदिर में चाँदी के नाग चढ़ाने से भक्तो को उनके कष्टों और पापो से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगो की कुंडली में सर्प दोष होता है , उन्हें इस मंदिर में आकर सोने, चांदी से नागो को दान करने से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। रूद्र संहिता में भगवान शिव को दारुकावन नागेशम कहा गया है जिसका मतलब होता है दारुका वन में रहने वाले सभी नागो के देवता।
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Nageshvara Temple से जुड़े विवाद
शिव महापुराण के अनुसार यह मंदिर Arabian Sea में है but इस मंदिर की actual location आज भी एक controversy बनी हुई है। कुछ पुराणी मान्यताओं के अनुसार दारूकावन उत्तराखंड में स्थित देवदार के जंगल को कहा जाता है। देवदार का पेड़ महादेव को अत्यंत प्रिय होता है। पहले के समय ऋषि इसी देवदार के पेड़ के नीचे तपस्या करके भगवान शिव को खुश करते थे।
इस वजह से उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित जागेश्वर मंदिर को Nageshvara Temple भी बोला जाता है। कुछ हिन्दू पुराणों के अनुसार दारूकावन को द्वारकावन भी बोला गया है but जिस स्थान पर ये मंदिर है वहाँ द्वारिका में कभी कोई जंगल नहीं था। श्रीकृष्ण ने भी द्वारका में सिर्फ़ 2 ही स्थानों के बारे बताया है पहला सोमनाथ और दूसरा प्रभास तीर्थ लेकिन कभी भी Nageshvara Temple के बारे में नहीं बताया।

Conclusion
सभी देवी देवताओ में भगवान शिव को सबसे ज्यादा importance दिया जाता है। इन्हे खुश करना काफी आसान है। इनसे जुड़े सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की अपनी अलग अलग मान्यताएं है but Nageshvara Temple से जुडी बहुत सी controversies भी है। अलग अलग पुराणों के अनुसार इस मंदिर को अलग अलग स्थानों पर बताया गया है।
जिन लोगो की कुंडली में सर्प दोष होता है अगर वो इस मंदिर में सोने चाँदी से बने नाग नागिन के जोड़े दान करते है तो उन्हें इस दोष से मुक्ति मिल जाती है। अगर आपको हमारा ये blog पसंद आया तो comment के through हमें जरूर बताएं।
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