Grishneshwar Temple: भारत एक ऐसा देश है जिसके हर कोने में कई सारे mysterious temple है। हर देवी देवताओ से जुड़े कई मंदिर ऐसे है जिसकी mystery आज तक solve नहीं हो पाई है। मंदिरो से जुड़े mysteries की बात जब भी आती है तब महादेव से जुड़े ज्योतिर्लिंगों की बात जरूर होती है।
महादेव से जुड़े हर ज्योतिर्लिंग की अपनी अलग अलग कहानी और mystery है। अपने पिछले blogs में हमने Somnath, Mahakaleshwar, Rameshwaram, Kedarnath, Omkareshwar, Mallikarjuna, Kashi Vishvanath, Trimbakeshwar and Nageshwar से जुड़े mysteries को बताया था। इस blog में हम Grishneshwar Temple के बारे में बताएँगे।
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भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में से Grishneshwar सबसे आखिर में आता है। ये मंदिर Maharashtra के Aurangabad District में है। Grishneshwar के अलावा Maharashtra में 2 और ज्योतिर्लिंग Bhimashankar and Trimbakeshwar है। इस मंदिर को Ghushmeshvar Temple भी बोला जाता है। इस मंदिर की चर्चा शिव पुराण, स्कन्द पुराण, रामायण और महाभारत में भी है। यह मंदिर World Heritage Site Ellora Cave से लगभग 1.5 KM दूर है।
History
भगवान शिव के इस मंदिर को 13th and 14th century में Delhi Sultanate के द्वारा कई बार तोडा गया। Mughal Maratha War के time इस मंदिर को कई बार तोडा और बनाया गया। Present मंदिर का structure 18th Century में Mughal Empire के downfall के बाद Indore की महारानी Devi Ahilyabai Holkar ने करवाया।
16th Century में Chhatrapati Shivaji Maharaj में दादा Maloji Bhosale ने इस मंदिर का reconstruction करवाया। बाद में 18th Century में Devi Ahilyabai Holkar ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। Devi Ahilyabai Holkar ने Grishneshwar Temple के अलावा Varanasi का Kashi Vishvanath, Gaya का Vishupad and Gujrat का Somnath Temple मंदिरो का भी निर्माण करवाया।
इस वजह से नाम पड़ा Ghushmeshvar
पुराणों के अनुसार Devgiri Mountains पर एक ब्राह्मण सुधर्मा अपनी पत्नी सुदेहा के साथ रहता था। उन दोनों में बहुत प्यार था but Astrological Calculations के अनुसार सुदेहा कभी माँ नहीं बन सकती थी। सुदेहा ने अपने पति सुधर्मा से अपनी छोटी बहन घुश्मा से शादी करने की ज़िद करने लगी।
अपनी पत्नी सुदेहा की ज़िद मानकर सुधर्मा ने घुश्मा से शादी कर ली। सुधर्मा भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी। वो हर दिन 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा किया करती थी। सुधर्मा और घुश्मा के शादी के कुछ समय बाद उनदोनो को एक बेटा हुआ।

अपने बच्चे के जन्म के बाद सुधर्मा और सुदेहा अपने जीवन में खुश थे but कुछ समय बाद सुदेहा को अपनी छोटी बहन घुश्मा से जलन होने लगी। सुदेहा को ऐसा लगने लगा कि अब घर में उसके लिए कुछ भी नहीं है। सुदेहा के इसी सोच ने उसके मन में अपनी बहन सुधर्मा और उसके बेटे से नफरत पैदा कर दी।
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एक दिन जब घुश्मा का बेटा रात में सो रहा था तो सुदेहा ने उसे मार दिया और उसकी लाश को उसी तालाब में फेक दिया जिस तालाब में घुश्मा रोज पार्थिव शिवलिंग की पूजा करती थी। मौत की खबर से पुरे घर में शोर मच गया लेकिन घुश्मा ने शिव की पूजा करनी नहीं छोड़ी। हर दिन के तरह उस दिन भी घुश्मा तालाब में पूजा करने गयी और देखा कि उसका बेटा तालाब से आ रहा है।
सुदेहा के ऐसा करने के कारण महादेव अपने त्रिशूल से उसका गला काटने गए लेकिन घुश्मा ने उन्हें ये बोलकर रोक लिया कि सुदेहा के ही कारण उसकी शादी सुधर्मा से हुई और बेटे का जन्म हुआ। घुश्मा ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वो हमेशा के लिए इसी स्थान पर रुक जाये। अपने भक्त की पुकार सुनकर महादेव ने एक शिवलिंग का रूप धारण किया और हमेशा के लिए इसी स्थान पर विराजमान हो गए। महादेव की भक्त घुश्मा के नाम पर ही इस मंदिर का नाम Ghushmeshvar Temple पड़ा।
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Grishneshwar Temple से जुडी मान्यताएं
भारत में कई सारे मंदिर ऐसे है जिनमे प्रवेश करने के लिए बहुत से नियम है। इन मंदिरो में प्रवेश के लिए dress code भी है। Ghushmeshvar Temple में प्रवेश करने के लिए पुरुषो के लिए एक नियम है। भारत में कई सारे मंदिर ऐसे है जिनमे प्रवेश करने के लिए बहुत से नियम है। इन मंदिरो में प्रवेश के लिए dress code भी है।

Ghushmeshvar Temple में प्रवेश करने के लिए पुरुषो के लिए एक नियम है। मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करने के लिए पुरुषो को leather के सभी सामान जैसे belt, purse को बाहर ही रखना पड़ता है and इसके साथ साथ सभी males को bare chested यानि की कमर के ऊपर के सभी कपड़ो को निकाल कर Ghushmeshvar Temple में प्रवेश करना होता है।
East Direction में होने के कारण sunrise के साथ ही सबसे पहले surydev यहाँ पूजा करते है। आदि गुरु शंकराचार्य ने इस ज्योतिर्लिंग के बारे में कहा था कि कलयुग में जब पाप बढ़ जायेगा तो जो भी भक्त महादेव के इस ज्योतिर्लिंग को सच्चे मन से याद करेगा उसके सारे पाप मिट जायेंगे। जहाँ एक ओर सारे मंदिरो में 108 चक्कर लगाए जाते है वही इस मंदिर में 101 चक्कर लगाए जाते है।

Conclusion
देवो के देव महादेव के हर ज्योतिर्लिंग के पीछे एक mystery है। हर मंदिर के पीछे की कहानी अपने आप में बेहद खास है। भगवान शिव के इस मंदिर का नाम उनकी भक्त घुश्मा के नाम पर पड़ा हैं। इस मंदिर के present structure का निर्माण Indore की महारानी Devi Ahilyabai Holkar ने 18th Century में करवाया था। अगर आपकोये blog पसंद आया हो तो comment के through हमें जरूर बताएं।
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