Bhimashankar: जाने कैसे कुम्भकर्ण के बेटे के कारण स्थापित हुआ ये मंदिर?1 min read

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Bhimashankar: भारत में कई सारे मंदिर ऐसे है जो काफी mysterious है। इन मंदिरो में भगवान शिव के भी कई सारे मंदिर है। महादेव से जुड़े 12 ज्योतिर्लिंग है जो काफी mysterious है। इन मंदिरो में से कई ऐसे है जिसकी कहानी तो हम जानते है।

But कुछ मंदिर ऐसे भी है जिसकी mystery आज तक हम नहीं जान पाए है। अपने पिछले blogs में हमने Somnath, Mahakaleshwar Temple, Rameshwaram Temple, Kedarnath, Omkareshwar Temple, Mallikarjuna Temple, Kashi Vishvanath, Trimbakeshwar, Nageshvara Temple, Grishneshwar Temple के mysteries के बारे में बताया था। आज के इस blog में हम Bhimashankar के mystery के बारे में बताएँगे।

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Bhimashankar Jyotirlinga

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह ज्योतिर्लिंग 4th place रखता है। यह मंदिर महाराष्ट्र के पुणे के पास Sahyadri Hills पर है। इस मंदिर में जो शिवलिंग है वो काफी मोटा है जिस वजह से इस मंदिर को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर महादेव के भक्तों में एक विशेष स्थान रखता है। Bhimashankar Temple महाराष्ट्र में 3 ज्योतर्लिंगो में से एक है। यह मंदिर भीमा नदी के किनारे है। इस मंदिर में कई तरह के plants and animals भी देखने को मिलते है।

मंदिर से जुड़ी मान्यता

ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के निर्माण का credit कुम्भकर्ण के बेटे भीमा को जाता है। भीमा का जन्म कुम्भकर्ण के मरने के बाद हुआ था। जब भीमा को पता चला कि उसके पिता को भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम ने मारा था। श्रीराम से बदला लेने के लिए भीमा ने ब्रह्मा देव को खुश करने के लिए कठिन तपस्या की।

ब्रह्मा जी के वरदान से भीमा बहुत शक्तिशाली हो गया और उसने पुरे देवलोक पर राज कर लिया। तब राजा कामरूप ने भीमा से बचाने के लिए भगवान शिव की पूजा करने लगा। भीमा को ये बात पता चलते ही उसने राजा की jail में डाल दिया।

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Jail में होने के बाद भी कामरूप ने शिवलिंग बना कर महादेव की पूजा करते रहा। गुस्से में आकर भीमा ने तलवार से उस शिवलिंग पर जैसे ही वार किया तभी महादेव खुद वहां प्रकट हुए and भीमा और महादेव के बीच भयंकर युद्ध हुआ। उस लड़ाई में भगवान शिव के एक हुंकार से ही भीमा का अंत हो गया। इसके बाद सभी देवताओं ने महादेव से इसी स्थान पर शिवलिंग के रूप में निवास करने की प्रार्थना की तब से ही यहां भगवान शिव को भीमाशंकर के नाम से पूजा जाता है।

Bhimashankar में शंकर जी के पसीने से निकली नदी

इस मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग काफी मोटा है इसलिए इसे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जानते है। यह मंदिर भीमा नदी के पास है जो कृष्णा नदी में जाकर मिलती है। शिवपुराण के अनुसार इसी स्थान पर कुम्भकर्ण के बेटे भीमा और महादेव के बीच युद्ध हुआ था और उसी लड़ाई में महादेव के पसीने की बूंदो से इस नदी का निर्माण हुआ।

मंदिर की histrory

ऐसा माना जाता है कि medieval era में Saint Namdev के अनुसार Saint Jnaneshwar Trimbakeshwar and Bhimashankar गए। Saint Namdev भी इस मंदिर का दौरा कर चुके है। 13th Century के कुछ articles में भी Bhimashankar Jyotirling की चर्चा है।

यहाँ मंदिर Nagrara style में बनाया गया है। इस मंदिर के hall का निर्माण 18th Century में नाना फडणवीस ने करवाया। मंदिर के गोपुर शिखर का निर्माण नाना फडणवीस ने करवाया। Chimaji Appa जो कि Bajirao I के भाई थे। उन्होंने मंदिर में एक बहुत बड़ी घंटी दान में दी थी जो मंदिर के सामने दिखाई पड़ती है। यह घंटी Portuguese colonists के Church की घंटी में से एक है जिसे Chimaji – Maratha की सेना को 1739 में Battle of Bacaim में Portuguese को हराने के बाद Vasai से लाया गया था।

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2 जगहों पर है Bhimashankar Temple

भारत में 2 जगहों पर भीमाशंकर मंदिर है। एक महाराष्ट्र के पुणे में और दूसरा आसाम के कामरूप जिले में है। भीमाशंकर जिस पर्वत पर है वहां ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां मिलती है जो पुरे भारत में कही और नहीं मिलती। आसाम में स्थित मंदिर बारिश के समय पूरी तरह से पानी में डूब जाता है। इसी मंदिर के पास कमलजा मंदिर भी है। कमलजा माता को माता पार्वती का ही रूप माना जाता है।

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Conclusion

हिन्दू धर्म में भगवान शिव को सबसे ज्यादा पूजा जाता है। इनसे जुड़े 12 ज्योतिर्लिंग है। हर ज्योतिर्लिंग की अपनी कहानी और mystery है। इन्ही ज्योतिर्लिंगों में से Bhimashankar एक है। ये मंदिर कुम्भकर्ण के बेटे भीमा के वजह से स्थापित हो पाया। मंदिर के पास बहने वाली नदी भगवान शिव के पसीने की बूंदे से बनी है। अगर आपको ये blog पसंद आया हो तो comment के through हमें जरूर बताएं।

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